देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान को लेकर सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों, बुजुर्गों, महिलाओं और कमजोर वर्ग के ऐसे लाभार्थी जो शिविरों तक नहीं आ सकते, उनके घर तक अधिकारी स्वयं पहुँचें, मौके पर ही आवेदन भरवाएँ और समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि यह अभियान किसी भी स्थिति में औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए।
मुख्यमंत्री आवास में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल समस्याएँ सुनना नहीं, बल्कि समाधान की पूरी प्रक्रिया का हिस्सा बनना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम निरीक्षण का नहीं, बल्कि सेवा, संवाद और समाधान का मंच है। बैठक में सचिव विनोद कुमार सुमन और अपर सचिव बंशीधर तिवारी भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिविरों की सूचना पहले से व्यापक स्तर पर दी जाए और उन्हें उत्सव के स्वरूप में आयोजित किया जाए। गढ़वाली, कुमाऊँनी और अन्य स्थानीय बोलियों में प्रचार-प्रसार अनिवार्य किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग सहज रूप से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि जनता को आवेदन के लिए भटकना न पड़े और हर समस्या के समाधान के लिए स्पष्ट समयसीमा तय हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहाँ समाधान तुरंत संभव हो, वहाँ मौके पर ही कार्रवाई की जाए। जहाँ समय लगे, वहाँ उत्तरदायित्व तय कर लाभार्थी को स्पष्ट जानकारी दी जाए। यदि किसी क्षेत्र से फीडबैक संतोषजनक नहीं मिलता है तो वहाँ पुनः शिविर लगाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने महिला मंगल दलों, स्वयं सहायता समूहों, युवक मंगल दलों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बार-बार सामने आ रही समस्याओं की सूची तैयार कर शासन को भेजी जाए। सभी विभाग साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजें और धीमी गति से कार्य करने वाले विभागों को चिन्हित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान के अंतर्गत अब तक 56,550 से अधिक लोग प्रतिभाग कर चुके हैं। उन्होंने हाल ही में बिना पूर्व सूचना अल्मोड़ा में आयोजित एक शिविर में पहुँचकर स्वयं जनता से फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे भी शिविरों का औचक निरीक्षण किया जाएगा, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे मंच तक सीमित न रहें, बल्कि स्टॉल स्तर पर जाकर नागरिकों से संवाद करें। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और कमजोर वर्ग को आवेदन, दस्तावेज़ और पात्रता से जुड़ी प्रक्रियाओं में प्रत्यक्ष सहायता दी जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बड़े न्याय पंचायतों में एक से अधिक कैंप लगाए जाएँ और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक अभियान पहुँचाया जाए। आधार कार्ड अपडेट, आयुष्मान कार्ड निर्माण जैसी आवश्यक सेवाएँ हर कैंप में उपलब्ध कराई जाएँ। प्रत्येक शिविर के बाद फीडबैक सर्वे और रिपोर्टिंग प्रणाली लागू हो। लाभार्थियों से कॉल या संदेश के माध्यम से समाधान की पुष्टि की जाए।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान का मूल उद्देश्य शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाना है। जनता को यह अनुभव होना चाहिए कि सरकार उनकी सुविधादाता है, बाधा नहीं।
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