February 4, 2026

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Uttarakhand Land Law: सरकार देगी जमीन के बदले विकसित जमीन और आजीविका भत्ता की सौगात

Uttarakhand Land Law: सरकार देगी जमीन के बदले विकसित जमीन और आजीविका भत्ता की सौगात: उत्तराखंड सरकार ने शहरी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भूमि पूलिंग नियमावली 2025 को कैबिनेट से मंज़ूरी दे दी है। यह मॉडल न सिर्फ जमीन मालिकों को बेहतर विकल्प देगा, बल्कि प्रदेश में योजनाबद्ध शहरीकरण का नया रास्ता तैयार करेगा। अब परंपरागत भूमि अधिग्रहण के स्थान पर साझेदारी आधारित विकास होगा—जहाँ मालिक अपनी जमीन देगा और बदले में विकसित प्लॉट व आर्थिक लाभ पाएगा।

 

क्या है नया भूमि पूलिंग मॉडल?

 

नई नीति के तहत भूमि मालिक स्वेच्छा से अपनी जमीन प्राधिकरण को विकास के लिए देंगे।

विकास के बाद—

✔ उन्हें निर्धारित हिस्सा रिहायशी व व्यावसायिक प्लॉटों के रूप में वापस मिलेगा

✔ प्राधिकरण बाकी जमीन को बेच या लीज पर दे सकेगा

✔ पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि सुनियोजित शहरी विकास है

 

प्रमुख सचिव आवास आर. मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, यह मॉडल उत्तराखंड में “नए जमाने का शहरीकरण” लेकर आएगा।

 

क्या मिलेगा जमीन मालिकों को?

 

1 विकसित प्लॉट – रिहायशी + कॉमर्शियल

 

24% तक विकसित रिहायशी प्लॉट

 

7% कॉमर्शियल प्लॉट

 

यदि कॉमर्शियल प्लॉट नहीं लेते हैं — 14% अतिरिक्त रिहायशी प्लॉट

 

प्लॉट न देने की स्थिति में मुआवजा:

 

रिहायशी: सर्किल रेट का दोगुना

 

कॉमर्शियल: सर्किल रेट का तीन गुना

 

2 कानूनी रूप से ट्रांसफर न होने वाली जमीन

 

22% रिहायशी

 

6% कॉमर्शियल

 

आजीविका भत्ता – तीन साल की आर्थिक सुरक्षा

 

भूमि मालिकों को जमीन के विकास के दौरान दिया जाएगा—

 

गैर कृषि भूमि: ₹12 प्रति वर्गमीटर प्रति माह

 

कृषि भूमि: ₹6 प्रति वर्गमीटर प्रति माह

 

भत्ता अवधि: अधिकतम 3 वर्ष, भुगतान तीन वार्षिक किस्तों में

 

25–30% राशि अग्रिम

 

छोटे भूमि मालिकों के लिए खास प्रावधान

 

250 वर्गमीटर से कम भूमि वालों को सीधे सर्किल रेट के हिसाब से नकद मुआवजा

 

कोई जटिल प्रक्रिया नहीं

 

13 चरणों में पूरी होगी योजना — पारदर्शी टाइमलाइन

 

90 दिन में बेस मैप व ड्राफ्ट लेआउट

 

15 दिन आपत्तियों की सुनवाई

 

15 दिन में अंतिम लेआउट प्रकाशन

 

30 दिनों में भूमि हस्तांतरण

 

पुनर्गठित प्लॉट जारी करने की जिम्मेदारी प्राधिकरण की

 

यह प्रणाली विकास कार्यों में तेजी और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।

 

निर्माण पर अस्थायी रोक

 

योजना घोषित होते ही संबंधित क्षेत्र में 2 साल तक निर्माण प्रतिबंध, जिसे 6–12 महीने बढ़ाया जा सकता है।

 

सबसे बड़ा लाभ:

➡ भूमि मालिक और सरकार के बीच पुनर्गठित प्लॉटों के स्थानांतरण पर कोई स्टांप ड्यूटी या रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं।

 

विवाद निपटान – तीन स्तरीय अपील प्रणाली

 

किसी भी विवाद की स्थिति में अपील के तीन स्तर—

 

प्राधिकरण के चेयरमैन

 

मुख्य प्रशासक, उत्तराखंड आवास विकास प्राधिकरण

 

इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कमिश्नर (अंतिम निर्णय)