January 12, 2026

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नोएडा में आयोजित 15वें उत्तराखंड महाकौथिक में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

नोएडा। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर स्थित नोएडा में पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित 15वें उत्तराखंड महाकौथिक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी नागरिक, कलाकार, युवा एवं महिलाएं मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और आयोजन की सराहना की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहते हुए भी उत्तराखंडी समाज द्वारा अपनी लोक संस्कृति, परंपराओं और पहचान को जीवंत बनाए रखना अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडी राज्य से दूर रहकर भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और वे उत्तराखंड की संस्कृति के सच्चे ब्रांड एम्बेसडर हैं।

सीएम धामी ने कहा कि पिछले 15 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा उत्तराखंड महाकौथिक, लोक कला, लोक संगीत, पारंपरिक विरासत और पहाड़ी उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने का सशक्त मंच बन चुका है। ऐसे आयोजन प्रवासी उत्तराखंडियों को एक-दूसरे से जोड़ने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकौथिक में पारंपरिक वेशभूषा, हस्तशिल्प, कारीगरी, जैविक उत्पादों और पहाड़ी व्यंजनों के साथ-साथ जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे लोकगीतों तथा छोलिया, पांडव और झोड़ा-छपेली जैसे लोकनृत्यों के माध्यम से उत्तराखंड की जीवंत लोकसंस्कृति सजीव रूप में देखने को मिलती है। उन्होंने आयोजन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इसकी अवधि पांच दिनों से बढ़ाकर सात दिन किए जाने को इसकी सफलता का प्रमाण बताया।

मुख्यमंत्री ने पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था की पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का सराहनीय कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत के पुनरुद्धार के साथ-साथ ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त किया जा रहा है।

सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। केदारखंड और मानसखंड मंदिर क्षेत्र, हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ का पुनरुद्धार, हरिद्वार-ऋषिकेश एवं शारदा कॉरिडोर, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड, ऑल वेदर रोड, भारतमाला, पर्वतमाला और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना जैसी योजनाएं राज्य के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती दे रही हैं।

उन्होंने बताया कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘एक जनपद, दो उत्पाद’, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’, स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, होम-स्टे योजना और सौर स्वरोजगार योजना जैसी कई प्रभावी पहल की जा रही हैं। इन प्रयासों के चलते उत्तराखंड ने सतत विकास लक्ष्यों में देश में पहला स्थान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में एचीवर्स तथा स्टार्टअप रैंकिंग में लीडर्स की श्रेणी प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और डेमोग्राफी की रक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध है। देवभूमि की पवित्रता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और अवैध गतिविधियों, अतिक्रमण तथा राष्ट्रविरोधी मानसिकता के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा,

“उत्तराखंड नफरत नहीं, संस्कार चाहता है; विभाजन नहीं, एकता चाहता है। हमारा लक्ष्य देवभूमि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है।”